शुब दीपावली - एक कविता

श्रीकृष्ण सत्यभामा नरकासुर को अंत करें हैं ये दिन
प्रभु श्रीराम सीता माँ समेत अयोध्या पंहुचे इस दिन
जैन मत प्रवक्ता श्री महावीर जी का आज जनम दिन
श्री गुरु गोविंद सिंह जी कारागार छोड़े हैं इसी शुब दिन
 
मिटा देना है शोकावली
बुजा देना है गुस्सावली
कम करना है तापावली
घर घर में फलना हास्यावली
 
आप सब को शुब दीपावली
आपकी जीवन कोलावारी कोलावारी दी बने रहना
आपकी जवानी शीला की जैसा नाचते बरकरार रहना
आपका हर दिन ऊलाला ऊलाला गाते मस्ती में गुजरना
 
आप जिंदगी भर कभी भी मुन्नी जैसा बदनाम न होना
निजाम चौकरी राजा जानी जैसा सदा सलामत रहना
रिंगा रिंगा रिंगा रिंगा डिंकचेका डिंकचेका मौज मनाते रहना
जीवन की किताब में एक नया पेज खोल दो दीवाली दिन
 
आज से अगला दीवाली तक आसमान छूते रहना हर कदम
खुद के लिए तो गली का कुत्ता भी और बहुत लोग जी लेते हैं
असली इंसान वो है जो दूसरों के लिए सिर्फ जीते नहीं पर वक्त भी देते हैं
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